Tuesday, March 15, 2016

PCS परीक्षा दे रहे हैं तो ये लेख जरुर पढ़ें, जरुर सफल होंगे

20 मार्च 2016 को होने जा रही यूपीपीसीएस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो UPPSC TARGET ग्रुप पर Arif Hussain Farooqui जी की ये पोस्ट जरुर पढ़े. आरिफ जी का ये लेख उन परीक्षार्थियों के लिए रामबाण हो सकता है जो या तो पहली बार परीक्षा दे रहे हैं या फिर बार-बार कुछ अंकों से मेंस तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. आपकी सहुलियत के लिए हम आरिफ जी का लेख साभार यहां पेश कर रहे हैं. आप इस लेख को पढ़े और अच्छा लगे तो नीचे फेसबुक शेयर का बटन दबाकर अपने मित्रों को भी बताएं.


Arif Hussain Farooqui
मेरा प्रति उत्तर (pcs हेतु)
UPPCS की 20 मार्च को जो परीक्षा होने जा रही है उस विषय पर बहुत से लोगों ने कुछ सवाल पूछे हैं 
सारी बातों को सुनने के बाद मैं कुछ नतीजे पर पहुंचा हूँ उनमें से यह की लोगों के ऊपर इस बार काफ़ी दबाव
है और कुछ लोग काफी डरे हुए भी हैं आयोग द्वारा जिस प्रकार के प्रश्न पूछे जा रहे हैं उसे देखते हुए बहुत
निश्चिन्त भी नही हुआ जा सकता भूगोल में कुछ प्रश्न इस तरह के पूछे जा रहे हैं जो अमूमन आम किताबों
में भी नही मिलते इसी तरह विज्ञान का भी यही हाल है इतिहास में 5 या 6 प्रश्न इस तरह के होते हैं जो स्वयं
इतिहास वालों के लिए भी कठिनाई खड़ी कर देते हैं रही बात कृषि की तो रोग या किस्मों वाले प्रश्न छात्रों
का काफी समय खा जाते हैं और दबाव बनाने में कोई कसर नही छोड़ते। जहाँ तक बात रही अर्थशास्त्र की तो यह विषय सदा से ही भय पैदा करने वाला रहा है इसके आंकड़े वाले प्रश्न छात्रों को असहज कर देते हैं केवल इस विषय के जानकार ही इसके काफी कुछ प्रश्नों का उत्तर दे पाते हैं। भारतीय संविधान से सम्बंधित प्रश्न बहुत कठिन तो नही होते फिर भी 2/3 प्रश्न ग़लत हो ही जाते हैं रही बात कर्रेंट अफेयर की तो इसके कुछ प्रश्न तो ऐसे होते हैं जो किसी पत्रिका में भी नही मिलते इस पक्ष में छात्रों को संशय और भ्रम के कारण भी बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। बहुत सारी तात्कालिक सूचनाएं जब दिमाग में एक साथ घूमने लगती है तो फिर अक्सर दुविधा कि स्थिति उत्पन्न हो जाती है जो घातक हो जाती है।
इस प्रकार निश्चित रूप से छात्रों के लिए 110 प्रश्न करना आसान नही होता केवल कुछ ही छात्र इस 
आंकड़े को पार कर पाते हैं अब इस स्थिति में रही मेरे उत्तर की बात तो यहाँ यह
समझ लेना चाहिए कि 150 में से 80 से 85 प्रश्न ही  अमूमन छात्रों की पकड़ में रहते हैं 60 से 65 प्रश्नों
में छात्रों की स्थिति बहुत सहज नही रहती फिर भी कुछ तर्क वितर्क करके 100 प्रश्न लगभग पहुँच जाते हैं

फिर यहाँ से ऊपर उठना काफी कठिन हो जाता है। होता ये है कि जो प्रश्न अंदाज़े पे लगाए जाते हैं वे अधिकतर ग़लत ही हो जाते हैं रही सही कसर जल्दबाज़ी के कारण कुछ आसान प्रश्नों के ग़लत हो जाने के कारण पूरी हो जाती है। अतः 103 या 104 के आस पास ही आकर बहुत से छात्रों का रथ रुक जाता है।
इस सन्दर्भ में मेरा कुछ सुझाव ये है कि पहले तेज़ी से केवल एकदम सही आने वाले प्रश्नों को हल करके गिन
लेना चाहिए। फिर उन प्रश्नों को हल करना चाहिए जिनमे केवल दो विकल्पों में संशय की स्थिति हो।
यहाँ पर तर्क वितर्क का काफी इस्तेमाल करना चाहिए ऊपर की उत्तर सीरीज भी देख लेनी चाहिए विकल्प के
शब्दों को काफी गहराई से समझना चाहिए। समय की मांग को पहचानना चाहिए और दोनों विकल्पों में से 
उसे चुन लेना चाहिए जो इन सब परीक्षाओं में खरा उतर जाए यदि फिर भी बात समझ में न आए तो फिर दिल
जिस विकल्प पर संतुष्ट हो जाए उसे चुन लेना चाहिए। जो प्रश्न एकदम न आ रहे हों उन्हें बस यूँ ही नही लगा
देना चाहिए बल्कि शब्दों के आकार-प्रकार उनकी विचित्रता, कोमलता, शब्द का एकदम अलग दिखना
और साथ में अच्छा भी लगना, आदि को देखना चाहिए साथ ही ये भी सोंचना चाहिए कि इन चारों विकल्पों के
शब्दों में से कौन सा शब्द प्रश्न बनाने वाले को प्रिय रहा होगा इस प्रकार यदि कुछ आकलन कर लिया जाए तो
यह उस स्थिति से कही बेहतर होगा जिसमे बस आँख मूँद के विकल्प चुन लिया जाए।
इस प्रकार यदि हम कुछ सावधानियां रखें तो कोई कारण नही की हम 110 का आंकड़ा न छू ले बल्कि
इससे ऊपर भी जाया जा सकता है। 

(आरिफ हुसैन फारूकी)
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