Saturday, June 4, 2016

चाबहर बंदरगाह त्रिपक्षीय समझौता, क्यों जरुरी था ये समझौता?

                  (सम-सामयिक घटनाचक्र ने चाबहर पर बहुत ही अच्छा लेख छापा है. आप इसे यहां पढ़ सकते हैं.)

चाबहर बंदरगाह दक्षिण-पूर्व ईरान में ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह है जो दक्षिण एशियाई देशों को मध्य एशिया के साथ व्यापार करने का न्यूनतम दूरी का समुद्री मार्ग उपलब्ध कराता है। चाबहर बंदरगाह भारत के लिए व्यापारिक और स्त्रातजिक दोनों दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण है। भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण अफगानिस्तान तक यह समुद्री मार्ग उपलब्ध कराता हैं। इसके अलावा ग्वादर बंदरगाह (ब्लूचिस्तान-पाकिस्तान), जिसका विकास चीन कर रहा है, को भी यह संतुलित करेगा। व्यापारिक दृष्टि से मध्य एशिया के साथ व्यापार के लिए पाकिस्तान पर भारत की निर्भरता का बेहतर विकल्प है।

यद्यपि भारत ने 1990 के दशक में इस बंदरगाह का आंशिक रूप से विकास किया था, लेकिन इस संदर्भ में बड़ा कदम वर्ष 2011 में अश्गाबत समझौते के रूप में उठाया गया। इसमें भारत, ओमान, ईरान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान एवं कजाख्स्तान शामिल थे। इसका उद्देश्य वस्तुओं के परिवहन के लिए एशिया और पर्शियन गल्फ के मध्य अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट परिवहन कॉरिडोर विकसित करना था। इसी क्रम में ईरान सरकार ने भारत के साथ वर्ष 2015 में अलग से एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। इस समझौते के अनुसार, बंदरगाह का विकास ‘विशेष उद्देश्य माध्यम साधन’ (Special Purpose Vehicle-SPV) पर आधारित 85 मिलियन डॉलर के निवेश के जरिए किया जाएगा। इस समझौते को मूर्त रूप देने के लिए 11 अप्रैल, 2016 की द्वितीय त्रिपक्षीय बैठक अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इससे संबंधित महत्त्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं-
  • चाबहर बंदरगाह के विकास के संदर्भ में द्वितीय तकनीकी बैठक का आयोजन नई दिल्ली में किया गया।
  • इस बैठक में भारत, ईरान और अफगानिस्तान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
  • इस बैठक में चाबहर में ‘अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट-परिवहन कॉरिडोर’ (International Transit-Transport Corridor) को स्थापित करने संबंधी त्रिपक्षीय करार को अंतिम रूप दिया गया जिसके बाद यह इन तीनों देशों के उच्चस्तरीय अधिकारियों के हस्ताक्षर हेतु तैयार हो गया है।
  • इस करार के मसौदे में चाबहर पत्तन के जरिए विभिन्न पक्षकारों के भू-भागों में माल एवं यात्रियों की आवाजाही हेतु आवश्यक कानूनी रूपरेखा का प्रावधान किया गया है।
  • इस बैठक में अफगानिस्तान की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आर्थिक सहयोग के महानिदेशक वाहिद वाइसी (Wahid Waissi) ने किया।
  • इस बैठक में प्रतिभागियों ने उन मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जिन पर वर्ष 2015 में तेहरान में हुई प्रथम तकनीकी बैठक में सहमति नहीं बन पाई थी।
  • इस समझौते को मूर्त रूप देने के पश्चात तीनों पक्ष इस समझौते के फ्रेमवर्क के तहत एक उपसमिति के गठन हेतु सहमत हुए हैं।
  • यह उपसमिति 6 माह के अंदर ट्रांजिट (Transit), पोर्ट (Port) और कस्टम तथा वाणिज्य दूत संबंधी (Custom and Consular) प्रोटोकॉल को उपलब्ध कराएगी।
  • इन तीनों देशों के उच्चस्तरीय अधिकारियों के हस्ताक्षर के लिए इस समझौते को सक्षम प्राधिकारी द्वारा अगले 2 माह में पूर्ण करा लेने पर सभी पक्ष सहमत हुए हैं।
  • इस समझौते के पूर्ण होने से भारत को अफगानिस्तान में और इससे आगे मध्य एशिया में पहुंच बनाने हेतु एक विश्वसनीय समुद्री मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।
  • चाबहर बंदरगाह ईरान के दक्षिण-पूर्व (सीस्तान-ब्लूचिस्तान प्रांत) में अवस्थित है। इस बंदरगाह के प्रयोग से इस क्षेत्र के देशों के मध्य समुद्री व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
  • चाबहर बंदरगाह के जरिए न केवल व्यापारिक वस्तुओं के मूल्य में कमी आएगी अपितु यह दक्षिण एशिया को मध्य एशिया तथा खाड़ी देशों को मध्य एशिया से जोड़ने में भी सहायक है।
                                                                                                                         लेखक-देवमन यादव
      (साभार-सम-सामयिक घटनाचक्र...पूरा लेख पढ़ने के लिए आप घटनाचक्र की साइट पर जा सकते हैं. यहां पर CLICK करें)

No comments:

Post a Comment